एक और दिन


एक और दिन जीता हूँ,
एक और रात मरता हूँ,
इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ|

आफ़ताब से जलता हूँ,
महताब से पिघलता हूँ,
हर लम्हा तेरे बिन,
पुर्जों में ढलता हूँ|
इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ|

लबों से ख़ामोशी का वादा है मेरा,
चेहरे के नकाब से डरता हूँ|
इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ|

जला कर मुझे राख को, फिजा में उदा देना|
मेरी अदा है, मैं कतरा कतरा बिखरता हूँ|
इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ|

मायूस किया है मैंने कई रहनुमाओं को,
रास्ता वही है मेरा जहाँ में पैर रखता हूँ|
इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ|

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