एक ख्याल


उन लम्हों को फिर जिया जाए आज,
चुभा था जिसका कांटा,
उस गुल को फिर छुआ जाए आज|

अपना मुकद्दर हातों में लिए फिरता हूँ,
कुछ तकदीरों का मज़ा भी लिया जाए आज|

सूख चली हैं ज़िन्दगी की राहें, वक़्त भर चला ज़ख्म,
एक अश्क पलकों में छुपा के, बारिशों का मज़ा लिया जाए आज|

सोचता हूँ साकी को रुसवा कर दूं,
चलो उसकी आँखों से फिर पी जाए आज|

अब कोई नहीं वहां आंखें बिछाए,
फिर भी आवारा दिली में,
उन रास्तों पे फिर गुजरा जाए आज|

अब तो बस यादें हैं,
क्यों रोया है दिल,
जैसे बिछड़ा है वो फिरसे आज|

‘वीर’ तेरे कुछ सवालों का जवाब उनके पास नहीं,
बेबस खामोशियों की सदा सुनी जाए आज|

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