रिश्तों में दूरियाँ


दोस्ती करके भुलाना नहीं जानता,
रिश्तों में दूरियाँ बनाना नहीं जानता|

कहता है वो, टूट गए सब मरासिम,
नादान…
झूट को सच का नकाब पहनना नहीं जानता|
रिश्तों में दूरियाँ बनाना नहीं जानता…..

मेरी कहानी, मेरी जुबानी, फ़साना हो गयी|
शायद, वो इस नाम का कोई दीवाना नहीं जनता|

रिश्तों में दूरियाँ बनाना नहीं जानता…..

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