समंदर का खारा पानी


छुपा नहीं सकता, जज्बातों को तहज़ीब का पेहरा|
डूब गयी कितनी दास्ताने, ये ज़ख्म है कितना गहरा|
कोई टूटे ख्वाब की सदा हो,या बिछड़े प्यार की निशानी|
कुछ तो बयां कर रहा है,
आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी|

अश्क आँखों का खिलौना नहीं, किसी दर्द का बिछौना नहीं|
ये बंद पिंजरे का परिंदा नहीं, ये तो बादल है एक आसमानी|
किस राह पे बरस रहा है,
आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी|

मेरा कोई हिस्सा मुझसे ले गया,
हर हमराह एक ज़ख्म नया दे गया|
फीके पड गए, ज़हन के निशान,
अब याद नहीं, चोट नई है या पुरानी|
शायद कोई मरहम हो,
आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी|

इधर कोई गम है, उधर कोई गम,
कहना दोनों को है, कहते नहीं हम|
क्या तेरी, क्या मेरी, इश्क की एक है कहानी|
मुझसे क्या कह रहा है
आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी|

वीर,
हमें क्या समझाते हो !
अपने दिल की सुनो, कर न पाओगे बात बेमानी|
सच्च ही कह रहा है
आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी|

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