एक कमी है अनजानी सी


जिंदिगी लगती है कहानी सी,
एक कमी है, अनजानी सी|

काटती है पत्थर सालों से,
उम्र बहती है, पानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

कुछ आशना है उस अजनबी से,
सूरत लगती है, पहचानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

भूल जाता हूँ मिलके उससे,
क्या बात है, बतानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

जो चाहा सब है हासिल,
ज़हन में क्यों है, वीरानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

पहचान में नहीं आता अक्स,
तस्वीर लगती है, पुरानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

बेफिक्र बेहिसाब आवारगी,
रुत लगती है, जवानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

सिला प्यार का प्यार ही मिले ‘वीर’,
उम्मीद लगती है, बेमानी सी|
एक कमी है, अनजानी सी|

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One Response

  1. i didn’t know my bro is such a good shayar
    brilliant ghazals………..
    keep going………..

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