आपने फ़र्ज़ निभाया है


आपने फ़र्ज़ निभाया है,
हम पे क़र्ज़ चढ़ाया है|

कभी थोडा कर भी लेते,
क्यों सिर्फ प्यार जताया है|
हम पे क़र्ज़ चढ़ाया है|

बार बार जताकर अहसानों को,
आपने हमारा सर झुकाया है|
हम पे क़र्ज़ चढ़ाया है|

हारेगा तू ही इस रंजिश में ‘वीर’,
किसने लकीरों को मिटाया है|
हम पे क़र्ज़ चढ़ाया है|

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