फासले खुद से खुद के


फासले खुद से खुद के, मिटाए ना गए,
झूट खुद से खुद के, भुलाये ना गए|

तामीर किया था बड़ी शिददत से इसे,
घर खुद से खुद के, जलाये ना गए|

खोकले उसूलों ने छुपा दिया आइना,
राज़ खुद से खुद के, बताये ना गए|

सुलझी जिंदिगी कुछ उलझी इस तरह,
तार खुद से खुद के, सुलझाए ना गए|

हालात को बना के मुजरिम वफ़ा का,
वादे खुद से खुद के, निभाए ना गए|

यूँ मशरूफ रहा उम्र भर दुनिया में,
रिश्ते खुद से खुद के, बनाए ना गए|

बेबसी की चादर ओढ़ रखी है,
कुसूर खुद से खुद के, उठाये ना गए|

बरसों इन चिरागों से रोशन थी राहें ‘वीर’,
ख्वाब खुद से खुद के, भुजाए ना गए|

Advertisements

2 Responses

  1. फासले खुद से खुद के, मिटाए ना गए,
    झूट खुद से खुद के, भुलाये ना गए|

    खोकले उसूलों ने छुपा दिया आइना,
    राज़ खुद से खुद के, बताये ना गए|

    बेहतर अश्आर….

  2. फासले खुद से खुद के, मिटाए ना गए,
    झूट खुद से खुद के, भुलाये ना गए|

    तामीर किया था बड़ी शिददत से इसे,
    घर खुद से खुद के, जलाये ना गए|

    खोकले उसूलों ने छुपा दिया आइना,
    राज़ खुद से खुद के, बताये ना गए|

    आपकी रचना कमेन्ट की मोहताज़ नहीं ….. क्या कहूँ …. बहुत सुंदर रचना …. धन्यवाद

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: