कोयले का अंगार

कोयले का अंगार देखा है..
कैसे तिनका तिनका जलके राख होता है|

उसकी राख उस से लिपट कर,
उसे ही भुझाने लगती है..
उसका अपना ही कुछ,
उसकी घुटन बन जाता है..
उसे इंतज़ार है हवा के एक झोंके का..
कोयले का अंगार देखा है..

कभी भडकता, कभी घुटता ..
उम्र भर जलकर, उसे राख ही तो होना है|
कोयले का अंगार देखा है..

दरवाज़े सारे बंद हैं

कोई नहीं आएगा यहाँ,
इजाज़त नहीं हैं|
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

अंधेरा है ज़हन में,
कमरे की रौशनी मद्धम है …
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

मरासिम सारे यहाँ,
सर झुका के खड़े हैं|
आज इनका सामना मुझसे है|
आज ये जवाब देंगे अपने खोखलेपन का …
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

मेरी खुदी आज हाकिम है इनके जवाबों का..
इनकी जंजीरें आज इनके पैरों में है ..
मुझ तक हाथ बढ़ाने की हिम्मत नहीं है इनमे..
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है

खामोश ज़हन में कैद बेचैनी है,
हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है|

मत करो ज़ाया अपने जज़्बात तुम,
तकलीफ मेरी मुझे ही सहनी है|
हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है|

धुऐं से चुभते हैं मरासिम खोकले,
बेबस आंखें रात भर बहनी है|
हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है|

इल्म होता मेरी बेखुदी का उसे,
क्यों ज़रूरी हर बात कहनी है|
हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है|

बयां ना कर खलिश ‘वीर’,
दुनिया जो है वही रहनी है|
हमने लबों पे मुस्कुराहट पहनी है|

थोडा फासला ज़रूरी है

कुरबतें हैं फिर भी एक दूरी है,
क्या इश्क में थोडा फासला ज़रूरी है|

सितम आपके सब सर आँखों पर,
हमने तो आपकी हर सज़ा कबूली है|

लहरों से बहते रहने की फितरत,
हुनर है उसका या मजबूरी है|

जब सब कह दिया उससे फिर,
जाने बात कौन सी अधूरी है|

कोई देखे दुनिया तेरी आँखों से ‘वीर’,
तलाश जारी है, कोशिश पूरी है|

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