दरवाज़े सारे बंद हैं


कोई नहीं आएगा यहाँ,
इजाज़त नहीं हैं|
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

अंधेरा है ज़हन में,
कमरे की रौशनी मद्धम है …
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

मरासिम सारे यहाँ,
सर झुका के खड़े हैं|
आज इनका सामना मुझसे है|
आज ये जवाब देंगे अपने खोखलेपन का …
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

मेरी खुदी आज हाकिम है इनके जवाबों का..
इनकी जंजीरें आज इनके पैरों में है ..
मुझ तक हाथ बढ़ाने की हिम्मत नहीं है इनमे..
आज दरवाजे सारे बंद हैं …

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2 Responses

  1. मेरी खुदी आज हाकिम है इनके जवाबों का
    इनकी जंजीर आज इनके हाथों में हैं …
    बड़ी गहराई है पंक्तियों में …

  2. Veer jee,

    wakai sir, behad shanddar lekhan hai apka. dhero badhaiyan or shubhkamnayen…. apki kalam se main hamesha juda rehna chahunga,

    likhte rahiye

    OR agar mujh par likhe to jeewan paryant aabhari rahunga, mere naam ka kafi mazak udate hai log, kehte hai vinash karene hua hai…

    apki marzi, sirf gujarish hai/

    avinash shrivastava
    bhopal

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