हर कदम पे एक रिश्ता


हर कदम पर एक रिश्ता बिछड़ गया मुझसे|
तेरी कोई खता नहीं, कोई गिला नहीं तुझसे|

इस बगिया को सजाया मैंने ही नहीं,
जुदा ना हुई कभी आवारगी मुझसे|

कोई तेरा नहीं इस दुनिया में ‘वीर’,
इस ख्याल को ज़ब्त किसने किया तुझसे|

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One Response

  1. बहुत अच्छा । बहुत सुंदर प्रयास है। जारी रखिये ।

    आपका लेख अच्छा लगा।

    हिंदी को आप जैसे ब्लागरों की ही जरूरत है ।

    अगर आप हिंदी साहित्य की दुर्लभ पुस्तकें जैसे उपन्यास, कहानी-संग्रह, कविता-संग्रह, निबंध इत्यादि डाउनलोड करना चाहते है तो कृपया किताबघर पर पधारें । इसका पता है :

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