नींद का सौदा


रात घूरता हर तारा है मुझे,
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

जागते जागते आंखें थक गई,
किस मर्ज़ ने मारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

इस खेल का वो पुराना खिलाडी है,
उसने हर शर्त पे हारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

मैं तो ढलता गया तेरे हुकुम पर,
जिंदिगी तूने क्यों नकारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

अब जो भी दे सज़ा मंजूर है ‘वीर’,
इलज़ाम कबूल सारा है मुझे|

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One Response

  1. This is one of your best works!
    रात घूरता हर तारा है मुझे,
    नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

    I have always looked at the symbol of a star as something soothing, something that grants me peace. The thought of a staring pricky star is amazing.

    उसने हर शर्त पे हारा है मुझे|
    नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

    I am speachless. Your words are like your pricking stars. the light in them is disturbing!

    Beautiful 🙂

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