मेरी कलम टूट गई


मैंने बात झूट कही,
मेरी कलम टूट गई|

अच्छा ही हुआ शायद,
ये आदत भी छूट गई|
मेरी कलम टूट गई|

मेरी हमराह थी वो,
मुझसे ही रूठ गई|
मेरी कलम टूट गई|

ख्वाबों का था खज़ाना एक,
जिंदिगी उसे लूट गई|
मेरी कलम टूट गई|

Advertisements

3 Responses

  1. बहुत उम्दा!

    • शुक्रिया समीर जी|

  2. कभी कभी ऐसा लगता ही है। आप टूटी कलम से भी अच्छा लिखते हैं। शुभकामनायें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: