सवालों से मुलाक़ात हुई


मेरी सवालों से मुलाक़ात हुई …

थोड़े सहमे से थे वो|
इंतज़ार कब का दम तोड़ चुका था|
जवाब कब आने को थे..
मेरी सवालों से मुलाक़ात हुई …

फिर ये सहमे सहमे से क्यों हैं?
क्या वजूद का खतरा है इन्हें?
किस आहट से इनका दिल डूबा जाता है|

कौन है वहाँ? ज़रा परदे से बाहर आओ|

मैंने इतने साल इन्हें संभाला है,
अब ये मेरे अपने हैं|
चुभते नहीं है ये पहले जैसे..
हमें आदत है एक दुसरे की|

इस आहट से मैं भाग ना पाऊँगा,
मेरे पैरों की ही तो है,
बढ़ राहा हूँ मैं किस और ?

मेरी सवालों से मुलाक़ात हुई …

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