काँटा हूँ आपकी चुभन का


लिबास हूँ आपकी घुटन का,
काँटा हूँ आपकी चुभन का|

कह ना पाया वो बात अपनी,
ढूँढता है आसरा सुखन का|
काँटा हूँ आपकी चुभन का…

सी दिया आपने मेरे लबों को,
गवाह हूँ आपके सितम का|
काँटा हूँ आपकी चुभन का..

गर लिखता रहा इस जुनून से ‘वीर’,
बन जाएगा तू बुत एक वहम का|

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