कोई मेरे ख्याल का हुआ


कोई मेरे हाल का हुआ,
कोई मेरे ख्याल का हुआ|

सबके थे सबब अपने,
मुझे उम्र भर मलाल सा हुआ|
कोई मेरे ख्याल का हुआ…

बंदगी आशिकी बेखुदी मेरी,
अपने वजूद का सवाल सा हुआ|
कोई मेरे ख्याल का हुआ…

क्यों खालिख सी है सूरत पर,
क्या रंग उस गुलाल का हुआ|
कोई मेरे ख्याल का हुआ…

मेरे बयाने खुदी का माजरा,
ज़माने में क्यों बवाल सा हुआ|
कोई मेरे ख्याल का हुआ…

अब सोचता रहेगा महीनो ‘वीर’,
क्या उसके गुज़रे साल का हुआ|

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