देखा ना सोचा ना


देखा ना सोचा ना!
बस कर दिया हवाले|
कौन कब तलक शीशा संभाले|

रखा ना अपना भरोसा बंद ताले में,
जो चाहे मेरी ज़मीन उड़ा ले|

है तेरे नज़र खुदी मेरी,
तू चाहे गिराए तो चाहे उठाले|

है मोहब्बत चारो और फेली,
तू जहाँ चाहे अपना घर बना ले|

तिनके का भी बड़ा दिल है ‘वीर’,
कहता हैं लहरों से जहाँ चाहे बहा ले|

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One Response

  1. nice poetry!

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