दो साये


जब दो दिल एक साथ धड़कते हैं,
जब दो साये एक साथ भटकते हैं|

कौन किसकी ताकत है किसे पता,
कभी रोते हैं तो कभी सिसकते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

कोई ढूँढता है खोया प्यार किसी में,
तो किसी के दर्द पिघलते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

कुर्बत की इन्तहा नहीं होती ‘वीर’,
हर गहराई पे नए मोती मिलते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

एक फ़साना तेरा कोई, एक कहानी मेरी,
हर रोज हम किसी किरदार में ढलते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

थामा है वक्त को लम्हा लम्हा,
रुका है ज़माना बस हम चलते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

प्यार लिखता हैं मेरी कहानी पन्ना पन्ना,
इनमे कभी फूल तो कभी कांटे मिलते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

सहेज लो मोहब्बत को दिल में ‘वीर’,
सुना है लोग इसके लिए उम्र भर त्तरसते हैं|
जब दो साये एक साथ भटकते हैं…

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One Response

  1. I can picture so many of these thoughts in bits and pieces. Your words add a special charm to them.

    सहेज लो मोहब्बत को दिल में ‘वीर’,
    सुना है लोग इसके लिए उम्र भर त्तरसते हैं|

    A very positive thought 🙂

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