पछतायेगा


मुझको खुदा मत बना पछतायेगा!

मैं बंदगी नहीं इखलास का प्यासा हूँ,
मुझको इबादत मत बना पछतायेगा|

है मुझ में दर्द कई, मैं भी नाराज़ हूँ खुदसे,
मुझको फरिश्ता मत बना पछतायेगा|

मैं हासिल से दूर ही भला, खाली हाथ जाऊँगा|
मुझको सिकंदर मत बना पछतायेगा|

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One Response

  1. “है मुझ में दर्द कई, मैं भी नाराज़ हूँ खुदसे,
    मुझको फरिश्ता मत बना पछतायेगा|”

    बहुत ही सुन्दर……

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