फर्क तो है


मुझ में तुझ में फर्क तो है,
मुझे तुझसा कोई दर्द तो है|

तू देखता है जिंदिगी लम्हा लम्हा,
मुझपे जिंदिगी का क़र्ज़ तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

तु ने बहाए हैं जो थोड़े अश्क मेरे,
मुझे इस बात का थोडा हर्ज तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

इतनी धुप की साया भी उबलता है,
मुझमें तेरे मासूम प्यार की सर्द तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

कोई दिल की सुनके भी जीता है यहाँ,
हर शख्स के पास निभाने को फ़र्ज़ तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

दे दे ज़हर तो हो इसका इलाज चारागाह,
जान के साथ जाए ऐसा ये मर्ज़ तो है|

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One Response

  1. इतनी धुप की साया भी उबलता है,
    मुझमें तेरे मासूम प्यार की सर्द तो है|

    …this thought couldn’t have been more beautiful!

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