गम हमारे खुशी अपनी


क्यों लिखते हैं बेखुदी अपनी,
हैं गम हमारे खुशी अपनी|

आईने से नाराज़ हैं हम,
है खुदसे बेरुखी अपनी|

कोई पूछे मंजिल तो क्या कहें,
आवारा कर गयी बेसुधी अपनी|

कौन हैं हालात का जवाबदार,
हैं हम और है बेबसी अपनी|

मिलो सबसे मुस्कुरा कर ‘वीर’,
ज़माना देखले जिंदादिली अपनी|

Advertisements

One Response

  1. बहुत बढिया रचना !!

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: