आवारा है वो


उथले समुन्दर का फेला किनारा है वो,
शायद मुझ जैसा ही आवारा है वो|

वो सही बेवफा ज़माने की नज़र में,
हर हाल में मुझे गवारा है वो|

उसे नहीं आरजू किसी से कोई,
तन्हा अपना खुद सहारा है वो|

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One Response

  1. वीर साहब आपकी कलम को मेरा सलाम …
    क्या लिखतें है आप ….
    जो दिल तक छु जाता है …

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