आदत हो गयी है


इंतज़ार की घडी इबादत हो गयी है,
ए दिल तुझे उसकी आदत हो गयी है|

कुछ सोच ले अपने बारे में भी,
खुदसे खुदकी मीठी बगावत हो गयी है|
ए दिल तुझे उसकी आदत हो गयी है…

उसके नाम से पुकार ना लूं रकीब को,
इश्क में बड़ी हिमाकत हो गयी है|
ए दिल तुझे उसकी आदत हो गयी है…

पहले नहीं थी जिंदिगी की कद्र इतनी ‘वीर’,
अब किसी और की ये अमानत हो गयी है|
ए दिल तुझे उसकी आदत हो गयी है…

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