भूल कर बैठा हूँ


कुछ पल जीने की भूल कर बैठा हूँ,
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ|

प्यासा रहना किस्मत है और फितरत भी,
तेरी आँखों से पीने की भूल कर बैठा हूँ|
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ…

यूँ तो आई थी मेरी राह में मोहब्बत कभी,
मैं ही इसे खोने की भूल कर बैठा हूँ|
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ…

अश्कों की रिमझिम से सहरा नहीं मिटता,
तेरे साथ दो अश्क रोने की भूल कर बैठा हूँ|
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ…

ख्वाब बुनने का हक हर किसी को नहीं,
खुली आँखों से सोने की भूल कर बैठा हूँ|

वक्त के साथ दर्द जिस्म बन जाता है ‘वीर’,
इन्हें फिर से छीने की भूल कर बैठा हूँ|
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ…

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: