कच्ची नींद का ख्वाब


कच्ची नींद का ख्वाब हसीन होता है,
थोडा नमकीन थोडा रंगीन होता है|

मचलता है मुमकिन की दीवारों से भिड कर,
कभी सांसों सा ज़मीन होता है|
कच्ची नींद का ख्वाब हसीन होता है…

लबों पर मुस्कुराहट बन नाचता है दिन भर,
शाम ढले थोडा ग़मगीन होता है|
कच्ची नींद का ख्वाब हसीन होता है…

वरना तो कल भी आज जैसा ही होगा ‘वीर’,
इन ख्वाबों से ही जिंदिगी पे यकीं होता है|
कच्ची नींद का ख्वाब हसीन होता है…

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One Response

  1. वरना तो कल भी आज जैसा ही होगा ‘वीर’,
    इन ख्वाबों से ही जिंदिगी पे यकीं होता है|
    कच्ची नींद का ख्वाब हसीन होता है

    sach to yehi hai ki khwaabo ke bina jindgi ke maayne kuch nahi ya yun kahe ki jindgi hi kuch nahi.

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