शब्दों का मदारी


शब्दों का मदारी समझते हो,
ख़ामोशी को वफादारी समझते हो|

रिश्तों में कोई प्यार नहीं है,
इन्हें बस जवाबदारी समझते हो|
शब्दों का मदारी समझते हो…

हाँ सोचता हूँ हर पल तुम्हे,
इसे मेरी बेरोज़गारी समझते हो|
शब्दों का मदारी समझते हो…

बस यूँ ही अनसुना कर देते हो,
या कोई बात हमारी समझते हो|
शब्दों का मदारी समझते हो…

जो हमने कही दिल की बात तुमसे,
क्यों इसे मेरी अदाकारी समझते हो|
शब्दों का मदारी समझते हो…

मेरी बंदगी ही मेरा ईमान है,
इसे किस्मत की लाचारी समझते हो|
शब्दों का मदारी समझते हो…

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One Response

  1. waah kya baat kahi…

    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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