तेरा हिस्सा कोई


मेरे ज़हन से लिपटा तेरा हिस्सा कोई,
लफ़्ज़ों की तलाश में भटकता किस्सा कोई|

जब नोचती है दुनिया मेरे सहमे दिल को,
मुझे सीने से लगा लेता है तेरा हिस्सा कोई|

ज़ुल्म ए फ़िराक से कब टूटा है ‘वीर’,
जोड़ देता है फिर खुदसे तेरा हिस्सा कोई|

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4 Responses

  1. बहुत बढ़िया!!

  2. अच्छी रचना है, बधाई.

  3. अच्‍छी रचना !!

  4. Laazabab

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