कातिल बना गयी


मेरी कमज़ोरी मेरा दामन जला गयी,
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी|

मेरी मोहब्बत शायद काफी ना थी,
मेरी फितरत मुझे नाकाबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

तुम मेरे नुस्क ना संभाल पाये,
मेरी आवारगी मुझे साहिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

खुदा तुमने बस एक दिल ही तो दिया,
मेरी इबादत मुझे काफ़िर बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

मैं तो बस मिट गया तेरी वफ़ा में,
आरजू मुझे हासिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

चलो तेरी कहानी से ये तो हुआ ‘वीर’,
कितनो को ये प्यार के काबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

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4 Responses

  1. खुदा तुमने बस एक दिल ही तो दिया,
    मेरी इबादत मुझे काफ़िर बना गयी|
    मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

    मैं तो बस मिट गया तेरी वफ़ा में,
    आरजू मुझे हासिल बना गयी|
    मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

    वाह जनाब वाह क्या बात कह दी आपने दो …
    बहुत गजब का लिखा है . .
    आपको और आपकी लेखनी को मेरा सलाम .

    • शुक्रिया!

  2. bahut khub

    shandar rachna

  3. bahut khuub!

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