अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर


तू घुल गया मुझमें इस कदर,
अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर|

एक पल भी नहीं जुदाई गवारा,
पहले नहीं था मैं इतना बेसबर|
अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर…

सारी खुदाई सारी खुदी फ़ना होगी,
तुम मिलो जाओ इस लम्हा अगर|
अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर…

यूँ तो आते हैं हमें बहाने कई,
जी लेंगे मुर्दों से, कर लेंगे बसर|
अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर…

कहते हैं कहीं खो गया है ‘वीर’,
यार इतने ना थे मुझसे बेखबर|
अब नहीं मुझे अपनी कोई खबर…

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2 Responses

  1. सुन्दर रचना।

  2. nice

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