जहाँ हम मिले थे


जहाँ कुछ लम्हें, मेरा हिस्सा बन गए|

जहाँ लम्हों में, सदियाँ गुज़ार गई थी|

जहाँ तेरी कसक मेरी तलाश थी|

जहाँ एक लहर समुन्दर बन गयी थी|

जहाँ खुदी सिर्फ एक खिलौना थी|

जहाँ वहम का वजूद नहीं था|

जहाँ सही गलत के दायरे खोखले थे|

जहाँ दर्द मोहब्बत में बिखरा था|

जहाँ आरजू सिसकती नहीं थी|

जहाँ ख्याल पहुँच नहीं पाते थे|

जहाँ लफ्ज़ हथियार डाल देते थे|

जहाँ ख्वाब खुदको तन्हा पाते थे|

जहाँ कुछ धुंधला सा… आँखों में तस्वीर सा जम गया था|

हाँ वो जगह,
जहाँ तुम और मैं मिले थे…

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