आसान ना होगा


नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा,
उसकी बेरुखी से कब तू वीर परेशान ना होगा|

शायद वहम ही हो उसकी मोहब्बत दोस्त मगर,
वहम के बगैर भी दिल को आराम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

माना मशहूर है किस्सा मेरी वफ़ा का यारों,
कौन आशिक शहर में बदनाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

एक आशियाँ के हैं तलबगार कितने यहाँ,
बात और के सबको कबूल ये अंजाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

यूँ तो शराब भी है और महफ़िल भी यहाँ,
बस मेरे हाथों में तेरा दिया जाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

मैं खामोश ही सह लूँगा तेरे सब सितम,
मेरे होठों पे मगर कोई इलज़ाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

बस ज़ाहिर है ज़बीं की लकीरों से ‘वीर’,
तेरी जुबां से ये काम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

जो धड़कता है वो बुझ भी जायेगा,
आखिर कब तलक ये तमाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

तोड़ दे दिल इस बार ऐसे मेरे खुदा,
बंदे को फिर कभी ये गुमान ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

तू रहा यूँ ही अगर फितरत से उखड़ा ‘वीर’,
तेरी किस्मत में एक भी रस्मी सलाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

लिखते लिखते बेचैन हो गया है ‘वीर’,
अब और उससे कलाम ना होगा|
नाज़ुक दिल में सितमगर रखना आसान ना होगा…

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3 Responses

  1. bahut sundar rachana

  2. really nice

  3. waah lajawaab…

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