प्यार के चंद किस्से हैं


प्यार के चंद किस्से हैं,
सब मेरे ही हिस्से हैं|

एक ही अंजाम सबका,
खामोश हम सिसके हैं|
प्यार के चंद किस्से हैं…

वो समझा नहीं हमें,
हुए हम पूरे जिसके हैं|
प्यार के चंद किस्से हैं…

अब अपना कुछ कहाँ,
हम जो हैं सब उसके हैं|
प्यार के चंद किस्से हैं…

कोई ग़ज़ल नहीं जिंदिगी,
बिखरे हुए कुछ मिसरे हैं|
प्यार के चंद किस्से हैं…

कहानी का तू किरदार नहीं ‘वीर’,
यहाँ बस तेरे कुछ ज़िक्रे हैं|
प्यार के चंद किस्से हैं…

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One Response

  1. waah bahut khoob sir..

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