नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे


बेरुखी का सबब बतायें तो बतायें कैसे,
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे|

कोई शख्स हो तो भुल भी जायें हम,
खुदको खुदसे भुलायें तो भुलायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

जिसकी तामीर में उम्र गुज़ार गयी,
उस घर को छोडके जायें तो जायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

आँखों में तस्वीर सा है मरासिम जो,
उस तस्वीर को मिटायें तो मिटायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

मायूस बच्चे सा दिल बस वहीँ अटका है,
बिना उसके इसे बहलायें तो बहलायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

उसने मुह मोड़ लिया अब तुझसे ‘वीर’,
तू ही बता अब उसे मनायें तो मनायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

इतनी मोहब्बत थी तुझसे ‘वीर’ हमें,
तेरी लाश को अब जलायें तो जलायें कैसे|
तुमसे नज़र मिलायें तो मिलायें कैसे…

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One Response

  1. very nice

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