कभी तुम तो कभी हम

सिलसिले ये किस बात के,
के खत्म नहीं होते|

ये कैसी कहानी है हमारी,
कभी तुम तो कभी हम नहीं होते|

याद आती तो है मगर कभी कभी,
कभी तुम तो कभी हम नहीं सोते|

दोनों दाना हैं इस बेहोशी में,
कभी तुम तो कभी हम नहीं रोते|

एक ऐसे लम्हे की तलाश है ‘वीर’,
जिसमें तू ना होता, जिसमें वो ना होते|

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