कल कर लूँगा

अपनी बात पे यकीं, कल कर लूँगा,
इस ख्याल को ज़मीन, कल कर लूँगा|

तनहाई में जलता है हर लम्हा,
उसकी यादों को हसीं, कल कर लूँगा|

कितने रिश्ते भुला दिए इश्क में,
अपनों को अज़ीज़, कल कर लूँगा|

मुस्कुरा कर मिलते हैं जो आज भी,
उनकी दोस्ती को तस्लीम, कल कर लूँगा|

वो भी तुझसा बेनसीब है ‘वीर’,
रकीब को नदीम, कल कर लूँगा|

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