कशमकश

ये थमती हुई साँसे,
ये जलते हुए रिश्ते,
इन चेहरों पे तबस्सुम आए भी तो कैसे|

हर शख्स परेशान,
हर अक्स धुन्दला,
कोई तस्वीर बनाये भी तो कैसे|

फिर वही खोखली आँखें,
फिर वही बेनाम से ख्वाब,
कोई दिल अरमान सजाये भी तो कैसे|

जहाँ देखो वहीं ज़ुल्म,
कुछ सोचो तो लाचारी,
बन्दे को खुदा नज़र आए भी तो कैसे|

खो गयी मेरी शक्सियत,
इन दौड़ते भागते सायों में,
में खुद को पहचानू भी तो कैसे|

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