कौन लेके चिराग आया है

हम तो अंधेरों में ही खुश थे,
कौन लेके चिराग आया है|

रोशन है हर कोना ज़हन का,
मुद्दत में अक्स नज़र आया है|

ना मिला वो गले ना ही सही,
बेहरहाल उसने हाथ बढ़ाया है|

उसकी अमदगी का मुन्तज़िर था ‘वीर’,
टूटे ख्वाबों से दिल सजाया है|

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