जब कभी बैठा मैं

उसके ख्यालों ने दस्तक दी,
जब कभी बैठा मैं|
अरमानो ने हसरत की,
जब कभी बैठा मैं|

बहलता नहीं दिल खिलोनों से,
फिर भी एक कोशिश की,
जब कभी बैठा मैं|

वजूद का सबब समझा नहीं ‘वीर’,
उस कातिल की तलाश की,
जब कभी बैठा मैं|

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