तुम आज आओ ना

तुम आज आओ ना,
हमेशा जैसे आते हो|
तन्हाई को सजाओ,
हमेशा जैसे सजाते हो|

भूल रहा हूँ मायने जिन्दिगी के,
फिर से मुझे याद दिलाओ,
हमेशा जैसे दिलाते हो|

नींद रूठी है तेरे बिन,
अपने दामन में सुलाओ,
हमेशा जैसे सुलाते हो|

ख़ामोशी का ज़हर है हवा में,
मुझे फिर से बुलाओ,
हमेशा जैसे बुलाते हो|

‘वीर’ को क्या गुम्मा हो चले हैं,
उसे असलियत दिखाओ,
हमेशा जैसे दिखाते हो|

%d bloggers like this: