थोडा फासला ज़रूरी है

कुरबतें हैं फिर भी एक दूरी है,
क्या इश्क में थोडा फासला ज़रूरी है|

सितम आपके सब सर आँखों पर,
हमने तो आपकी हर सज़ा कबूली है|

लहरों से बहते रहने की फितरत,
हुनर है उसका या मजबूरी है|

जब सब कह दिया उससे फिर,
जाने बात कौन सी अधूरी है|

कोई देखे दुनिया तेरी आँखों से ‘वीर’,
तलाश जारी है, कोशिश पूरी है|

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