नम आँखों से गुज़र जायेगी

सूखे पत्तों सी आई है याद,
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

यूँ तो ख़ामोशी है इनकी अदा,
बहते बहते ये कहानी बन जायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

खलिश है बीते कल की ये,
वरना बीती रुत कब आयेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

सदमों से खत्म नहीं होती जिंदिगी,
संभालते संभालते संभल जायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

है उम्र मुठी में रेत जैसे,
देखते देखते फिसल जायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

कुछ धीमी सी है आहट इसकी,
आते आते मौत आयेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

बहुत दाना है जिंदिगी दोस्त,
हर कदम पे ख्वाब नया दिखायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

कुछ रहता नहीं यहाँ रुक कर,
पल में तस्वीर बदल जायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

इतनी बिखरी है जिंदिगी मगर,
एक साँस में सिमट जायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

मुन्तज़िर कब तलक रहेगा ‘वीर’,
आरजू और कितना सतायेगी|
नम आँखों से गुज़र जायेगी|

Advertisements
%d bloggers like this: