बंद दरवाज़े

रस्मों की दीवारों पे जड़े बंद दरवाज़े,
खयालों की भीड़ में, खड़े बंद दरवाज़े|

ये जहाँ तुम्हारा, ये ईमान तुम्हारा,
मेरे अरमानो को क्या क़ैद कर सकेंगे,
तुम्हारी सोच के ये बंद दरवाज़े|

‘वीर’, एक दिन तेरी कहानी के गवाह बनेंगे,
खयालों की भीड़ में खड़े ये बंद दरवाज़े|

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