भीड़ यारों की

कोई बादल नहीं आसमान में,
क्या आरजू सो गई है|

नज़र आते हैं इतने साये,
क्या तन्हाई हो गई है|

महफ़िल कभी सज ना पाई तेरे बिन,
भीड़ यारों की हो गई है|

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