हिसाब

आओ हिसाब साफ़ कर लें,
खुदको खुदसे पास कर लें|

सच बोलना महंगा था ना सनम,
एक दुसरे के झूठ माफ कर लें|

नज़र आयें वैसे जैसे हैं हम दोनों,
ईमान अपना मिलकर पाक कर लें|

मैं बसा लूं आपको सीने में,
आप गिराके ज़ुल्फ़ को रात कर लें|

क्यों रहें हम पर्दों में ‘वीर’,
आओ दिल से दिल के बात कर लें|

अजब बात है

सब पा लिया खोके अजब बात है,
मेरी नज़र की भी गज़ब बात है|

ना चाँद, ना सितारे, ना बादल, ना हवा,
ज़हन में सिमटी हुई अजब रात है|

वो पास रहे ना रहे कोई फर्क नहीं,
करीब है हमेशा उसका अजब साथ है|

फर्क तो है

मुझ में तुझ में फर्क तो है,
मुझे तुझसा कोई दर्द तो है|

तू देखता है जिंदिगी लम्हा लम्हा,
मुझपे जिंदिगी का क़र्ज़ तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

तु ने बहाए हैं जो थोड़े अश्क मेरे,
मुझे इस बात का थोडा हर्ज तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

इतनी धुप की साया भी उबलता है,
मुझमें तेरे मासूम प्यार की सर्द तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

कोई दिल की सुनके भी जीता है यहाँ,
हर शख्स के पास निभाने को फ़र्ज़ तो है|
मुझ में तुझ में फर्क तो है…

दे दे ज़हर तो हो इसका इलाज चारागाह,
जान के साथ जाए ऐसा ये मर्ज़ तो है|

दोस्तों

कहना है तो आवारा मुझे कहो दोस्तों,
आओ मेरे साथ थोडा और बहो दोस्तों|

दोस्ती की है तो संभालो गिरते हुए,
बस देखते ना मुझे रहो दोस्तों|

मेरी फितरत तुम्हे ना लग जाए कहीं,
तुम भी ना लम्हा लम्हा मरो दोस्तों|

है इसकी अदा हमें तड़पाने की,
हौले हौले गम सहो दोस्तों|

क्या सब लाचार हैं तुझसे वीर,
कभी कुछ तो करो दोस्तों|

बात निकली

कहते कहते बात निकली,
करहा के हमसे आह निकली|

बंद ताले जब खोले हमने,
गुजरी हुई हर साँस निकली|

देखते देखते सहर हो गयी,
आँखों आँखों में रात निकली|

बंदगी की बाज़ी जीत तो गया,
इसमें खुदी की मात निकली|

कहाँ है तू मेरी हमनफस,
कहने को तो तू मेरे साथ निकली|

इसे मंजिल समझने कि भूल थी ‘वीर’,
देख इससे गुजरती कितनी राह निकली|

ना जी पाओगे

ख्यालों से मुझे ना समझ पाओगे,
लफ़्ज़ों से मुझे ना पकड़ पाओगे|

मेरे दर्द का एहसास तो होगा तुम्हे,
मेरी नम आँखों का ना देख पाओगे|

मुझे कतरा कतरा बाँट तो लोगे तुम,
इन कतरों से मुझे ना जोड़ पाओगे|

सुन भी लोगे सदा अगर चाहो तो,
मगर मेरी आह को ना सुन पाओगे|

मशवरा है कि ना आओ मेरे करीब,
इस गहराई में तुम भी डूब जाओगे|

मैं तन्हा ही रहूँगा ये हकीकत है,
तन्हाई मुझसे जुदा ना कर पाओगे|

तोड़ तो लोगे तुम मेरे शीशमहल को,
इसकी तस्वीर मुझसे ना छीन पाओगे|

आना भी चाहोगे अगर कभी अगर,
रास्तों को मुझ तक ना मोड़ पाओगे|

हो भी जाए अगर ज़हर पीना तुम्हे गवारा,
इस ज़हर को पिके मुझसे ना जी पाओगे|

ख्वाब तुम्हारा तोड़ दूं

लाओ मैं ही ख्वाब तुम्हारा तोड़ दूं,
बेवफा होकर दिल तुम्हारा तोड़ दूं|

अपने ही तो जलाते हैं जिस्म चिता में,
मैं ख्याल बनकर ज़हन तुम्हारा छोड़ दूं|

फिर तुम्हे मिले ना मिले कोई रहनुमा,
आज मैं ही रास्ता तुम्हारा मोड़ दूं|

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